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अपराध का स्वरूप बदला, कानून हुआ और सख्त; बेटियां डरें नहीं, आवाज उठाएं : कुसुम कंडवाल

महिला आयोग की कार्यशाला में साइबर सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और कानूनी अधिकारों की दी जानकारी, विशेषज्ञों ने बताए डिजिटल उत्पीड़न से बचाव के उपाय

टनकपुर/चम्पावत(दिलीप शर्मा): राष्ट्रीय महिला आयोग के सहयोग से उत्तराखण्ड राज्य महिला आयोग की ओर से शनिवार को डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम राजकीय प्रौद्योगिकी संस्थान, टनकपुर के सभागार में स्टॉकिंग एवं साइबर स्टॉकिंग की रोकथाम विषय पर एक दिवसीय जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम का संचालन कल्पना आर्य ने किया।

कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए उत्तराखण्ड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा कि यह आयोजन महज एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि नारी सुरक्षा, सम्मान और डिजिटल स्वाभिमान को लेकर जनजागरूकता का महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने कहा कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ अपराधों का स्वरूप भी बदल रहा है। पहले पीछा गलियों और सड़कों तक सीमित था, अब मोबाइल स्क्रीन और सोशल मीडिया के माध्यम से भी महिलाओं का उत्पीड़न किया जा रहा है। फर्जी प्रोफाइल, ऑनलाइन धमकी, अनचाही निगरानी और निजी जानकारी के दुरुपयोग जैसी घटनाएं डिजिटल सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती हैं।

उन्होंने कहा कि अपराध का स्वरूप भले ही बदला हो, लेकिन कानून अब और अधिक सख्त है। बेटियों को डरने के बजाय अपनी आवाज उठानी चाहिए। न्याय की दिशा में पहला कदम डरना नहीं, बल्कि शिकायत करना और आवाज उठाना है। उन्होंने छात्राओं और महिलाओं से किसी भी प्रकार के साइबर उत्पीड़न को नजरअंदाज न करने तथा समय रहते पुलिस एवं संबंधित हेल्पलाइन से संपर्क करने का आह्वान किया।

‘डिजिटल सुरक्षा के बिना विकसित भारत का संकल्प अधूरा’

कुसुम कंडवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के विकास में नारी शक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को शिक्षा, कौशल विकास, उद्यमिता और डिजिटल सशक्तिकरण के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारी सेवाओं में महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण, सशक्त बहना, मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना तथा लखपति दीदी जैसे प्रयास महिला स्वावलंबन को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि महिला आयोग पीड़ित महिलाओं और बेटियों को न्याय दिलाने तथा उनका मनोबल बढ़ाने के लिए हरसंभव सहयोग करेगा।

तकनीक का इस्तेमाल ज्ञान और नवाचार के लिए करें : मंडोरिया

संस्थान के निदेशक प्रो. हरिद्वारी लाल मंडोरिया ने महिला आयोग की पहल की सराहना करते हुए कहा कि डिजिटल तकनीक ने जीवन को सुविधाजनक बनाया है, लेकिन इसके साथ साइबर स्टॉकिंग और निजता के हनन जैसी चुनौतियां भी सामने आई हैं। उन्होंने युवाओं से तकनीक का इस्तेमाल ज्ञान, शिक्षा और नवाचार के लिए करने की अपील की। साथ ही कहा कि किसी भी गलत गतिविधि को देखकर मूकदर्शक बनने के बजाय पीड़ित व्यक्ति का सहयोग करना चाहिए।

कार्यक्रम में उपस्थित राज्य मंत्री किरन देवी एवं हेमा जोशी ने भी महिला आयोग की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्र टनकपुर में छात्राओं और महिलाओं को साइबर सुरक्षा, कानूनी अधिकारों तथा डिजिटल सतर्कता के प्रति जागरूक करने के लिए ऐसी कार्यशालाएं बेहद उपयोगी हैं। इससे बेटियों में आत्मविश्वास बढ़ने के साथ समाज में सुरक्षित वातावरण विकसित करने में भी मदद मिलेगी।

विशेषज्ञों ने दिए साइबर सुरक्षा के व्यावहारिक टिप्स

कार्यशाला के तकनीकी एवं मार्गदर्शन सत्र में विभिन्न विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को साइबर सुरक्षा और कानूनी संरक्षण के संबंध में जानकारी दी। पुलिस उपनिरीक्षक कमलेश भट्ट ने साइबर स्टॉकिंग, फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट, अनचाही ट्रैकिंग, ऑनलाइन पीछा करने, सोशल मीडिया फ्रॉड तथा साइबर सेल और हेल्पलाइन के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया समझाई।

उप जिला चिकित्सालय टनकपुर की सर्जन डॉ. प्रभा जोशी ने साइबर स्टॉकिंग और सोशल मीडिया के अत्यधिक दबाव से होने वाले मानसिक तनाव, चिंता और अवसाद के प्रभावों पर जानकारी दी। उन्होंने युवाओं को डिजिटल डिटॉक्स अपनाने और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या होने पर समय रहते चिकित्सकीय परामर्श लेने की सलाह दी।

महिला हेल्पलाइन प्रभारी महिला उपनिरीक्षक सिमरन ने सोशल मीडिया पर निजी जानकारी, फोटो, लोकेशन और पासवर्ड को सुरक्षित रखने के उपाय बताए। उन्होंने प्राइवेसी सेटिंग्स और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन के उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि डिजिटल उत्पीड़न की स्थिति में बिना झिझक पुलिस या महिला हेल्पलाइन से संपर्क करना चाहिए।

वन स्टॉप सेंटर की सेवाओं की दी जानकारी

वन स्टॉप सेंटर चम्पावत की केंद्र प्रशासिका एवं अधिवक्ता ऋतु सिंह ने महिलाओं को उपलब्ध कानूनी सहायता और साइबर अपराध से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वन स्टॉप सेंटर के माध्यम से महिलाओं को एक ही स्थान पर चिकित्सीय, कानूनी, मनोवैज्ञानिक और आवश्यकतानुसार आश्रय संबंधी सहायता उपलब्ध कराई जाती है। उन्होंने पीड़िताओं को समय पर शिकायत दर्ज कराने और उपलब्ध सहायता तंत्र का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के समापन पर उपाध्यक्ष सायरा बानो ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने लाभार्थियों को महालक्ष्मी किट भी वितरित की।

कार्यशाला में उत्तराखण्ड राज्य महिला आयोग की सदस्य रचना जोशी, जिला कार्यक्रम अधिकारी बृजवाल प्रकाश, निजी सचिव आधार वर्मा, रुचि धस्माना, दीपा जोशी, सुनीता मुरारी, बबीता गोस्वामी, तुलसी कुंवर, रीता कुलकोड़िया, सरोज चंद, बाल विकास परियोजना अधिकारी राजेंद्र बिष्ट एवं मोहन बिष्ट सहित संस्थान के शिक्षकगण, पुलिस-प्रशासन के अधिकारी और बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं।

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