ऋषिकेश में महा योग ध्यान कुंभ-9 का भव्य शुभारंभ, 18 देशों के 10 हजार से अधिक साधक ले रहे भाग
पद्मश्री डी. आर. कार्तिकेयन और साध्वी भगवती सरस्वती ने दिया ध्यान, करुणा व विश्व शांति का संदेश




- 27 अक्टूबर तक चलेगा पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय आयोजन, 108 घंटे का अखंड ध्यान और ऊर्जा मेला बना आकर्षण का केंद्र
मुनिकीरेती/टिहरी(दिलीप शर्मा): आध्यात्मिक नगरी ऋषिकेश में ध्यान, साधना और आध्यात्मिक चेतना के महापर्व ‘महा योग ध्यान कुंभ-9’ (MYDK 2026) का शुक्रवार को श्री स्वामीनारायण आश्रम, मुनि की रेती में भव्य शुभारंभ हुआ। पिरामिड स्पिरिचुअल सोसाइटीज मूवमेंट (पीएसएसएम) और पीएमसी हिंदी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय महोत्सव में भारत के विभिन्न राज्यों सहित 18 देशों के 10 हजार से अधिक पंजीकृत साधक भाग ले रहे हैं। 23 से 27 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले इस महाकुंभ की थीम ‘आंतरिक परिवर्तन से विश्व शांति’ रखी गई है। आयोजन को पर्यटन मंत्रालय के इनक्रेडिबल इंडिया अभियान और आयुष मंत्रालय का सहयोग प्राप्त है।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में आध्यात्मिक विभूतियों ने ध्यान के महत्व, आत्मबोध, मानसिक शांति और वैश्विक सद्भाव पर विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि ध्यान केवल व्यक्तिगत शांति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में करुणा, संवेदनशीलता और सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रभावी साधन भी है।

ब्रह्मर्षि सुभाष पत्री के संदेश से हुआ शुभारंभ
महोत्सव के उद्घाटन अवसर पर ब्रह्मर्षि पितामह सुभाष पत्री का रिकॉर्डेड संदेश प्रसारित किया गया। उन्होंने भगवान बुद्ध, भगवान कृष्ण, ईसा मसीह और गुरु नानक जैसे आध्यात्मिक महापुरुषों की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए आत्मबोध और ध्यान साधना की महत्ता बताई।
उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक उन्नति के लिए परिवार और नौकरी छोड़ने की आवश्यकता नहीं है। व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में स्वाध्याय, आध्यात्मिक साहित्य के अध्ययन और आनापानसति ध्यान के नियमित अभ्यास को शामिल करके भी आध्यात्मिक यात्रा आगे बढ़ा सकता है। उन्होंने पिरामिड निर्माण और ध्यान के अभ्यास का उल्लेख करते हुए साधकों को आध्यात्मिक अहंकार से बचने की सलाह भी दी।

ध्यान से व्यक्तिगत शांति और वैश्विक चुनौतियों के समाधान पर जोर
पूर्व केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) निदेशक एवं पद्मश्री सम्मानित डी. आर. कार्तिकेयन ने अपने संबोधन में भगवान बुद्ध से लेकर एस. एन. गोयनका तक विपश्यना ध्यान की परंपरा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ब्रह्मर्षि सुभाष पत्री ने आनापानसति ध्यान को सरल और जनसामान्य के लिए सुलभ बनाने पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने ध्यान, संगीत और पिरामिड ऊर्जा के साथ साधना के अभ्यास का उल्लेख करते हुए व्यक्तिगत शांति के साथ वैश्विक चुनौतियों के समाधान की दिशा में ध्यान की भूमिका पर प्रकाश डाला। साथ ही, उन्होंने पौध-आधारित आहार को अपनाने की उपयोगिता पर भी विचार रखे।
साध्वी भगवती सरस्वती ने समझाया साक्षी भाव का महत्व
परमार्थ निकेतन की अंतरराष्ट्रीय निदेशक साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि मां गंगा के पावन तट पर बैठकर व्यक्ति सहज रूप से शांति और ध्यान की अनुभूति कर सकता है। उन्होंने कहा कि ध्यान का अर्थ केवल आंखें बंद करके बैठना नहीं है, बल्कि जीवन के प्रत्येक क्षण में सजग, संवेदनशील और जागरूक बने रहना भी है।
क्रोध पर नियंत्रण के संदर्भ में उन्होंने साक्षी भाव को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि ध्यान व्यक्ति को अपनी भावनाओं को समझने और उन्हें सकारात्मक दिशा देने में सहायता करता है। इसके अभ्यास से क्रोध को प्रेम, रचनात्मक कार्यों और निःस्वार्थ सेवा में बदलने की प्रेरणा मिल सकती है।
स्वामीनारायण आश्रम में साधकों का स्वागत, आयोजन की यात्रा पर डाला प्रकाश
स्वामी सुनील भगत ने स्वामीनारायण आश्रम में देश-विदेश से पहुंचे साधकों का स्वागत किया। उन्होंने महा योग ध्यान कुंभ की पृष्ठभूमि साझा करते हुए बताया कि ब्रह्मर्षि सुभाष पत्री वर्ष 2013-14 में अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के दौरान ऋषिकेश आए थे। इसके बाद वर्ष 2017 में दिवंगत डॉ. एल. एन. शास्त्री के साथ इस आयोजन की शुरुआत हुई।
आचार्य गंगाराम ने ‘ध्यानं निर्विषयं मनः’ के सिद्धांत की व्याख्या करते हुए मन को बाहरी विषयों से हटाकर अंतर्मुखी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इंद्रियों को भीतर की ओर केंद्रित करने का अभ्यास व्यक्ति को अपने वास्तविक स्वरूप को जानने की दिशा में आगे बढ़ा सकता है।
स्वर्णमाला पत्री के मार्गदर्शन में हजारों साधकों ने किया सामूहिक ध्यान
कार्यक्रम के दौरान स्वर्णमाला पत्री के मार्गदर्शन में हजारों साधकों ने सामूहिक आनापानसति ध्यान का अभ्यास किया। इस दौरान साधकों ने आंखें बंद कर स्वाभाविक रूप से आने-जाने वाली श्वास पर ध्यान केंद्रित किया। हाथों की उंगलियों को आपस में जोड़कर मौन और श्वास के प्रति सजगता के साथ ध्यान साधना की गई।
पी. वी. रामराजू ने ध्यान की विभिन्न अवस्थाओं और आध्यात्मिक साधना की प्रगति के बारे में जानकारी दी। उन्होंने आनापानसति के माध्यम से मन की स्थिरता, आंतरिक ऊर्जा के अनुभव, कायानुपश्यना और विपश्यना की प्रक्रिया को समझाया।
उन्होंने ध्यान, स्वाध्याय, सत्संग और ध्यान के प्रसार को आध्यात्मिक प्रगति के महत्वपूर्ण चरण बताया। इनकी महत्ता समझाने के लिए उन्होंने ध्यान की गति 60, ध्यान के साथ अध्ययन की 160, सत्संग की 300 और ध्यान के प्रसार की 500 किलोमीटर प्रति घंटे के प्रतीकात्मक उदाहरण प्रस्तुत किए। इसका उद्देश्य साधकों को नियमित ध्यान के साथ अध्ययन, सामूहिक सहभागिता और सेवा से जुड़ने के लिए प्रेरित करना था।
बच्चों और युवाओं के लिए विशेष कार्यशालाएं आयोजित
महा योग ध्यान कुंभ के पहले दिन ध्यान विज्ञान, व्यावहारिक साधना और ध्यान संबंधी अनुभव साझा करने के लिए विभिन्न सत्र आयोजित किए गए। पिरामिड मास्टर्स ने प्रतिभागियों को ध्यान के नियमित अभ्यास और दैनिक जीवन में इसकी उपयोगिता के बारे में मार्गदर्शन दिया।
बच्चों के लिए स्वामीनारायण आश्रम की पहली मंजिल पर ‘जागृत किड्स’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें बच्चों के सामाजिक-भावनात्मक विकास, एकाग्रता और ध्यान के अभ्यास पर विशेष ध्यान दिया गया।
वहीं, इंदिरा निकुंज में आयोजित ‘स्वानुभव यूथ’ कार्यक्रम किशोरों और युवाओं को समर्पित रहा। इसमें 12 से 25-30 वर्ष आयु वर्ग के प्रतिभागियों को ध्यान को जीवनशैली का हिस्सा बनाने, पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ाने और मानसिक संतुलन विकसित करने के लिए प्रेरित किया गया।
108 घंटे का अखंड ध्यान, छह-छह घंटे की पालियों में साधना
महोत्सव के प्रमुख आकर्षणों में स्वामीनारायण आश्रम में आयोजित 108 घंटे का अखंड ध्यान शामिल है। 23 से 27 अक्टूबर तक चलने वाली इस साधना के लिए छह-छह घंटे की पालियों में चौबीसों घंटे ध्यान की व्यवस्था की गई है। इसके माध्यम से साधकों को निरंतर ध्यान और आध्यात्मिक अनुशासन का अनुभव करने का अवसर मिल रहा है।
आश्रम परिसर में ‘ऊर्जा मेला’ भी लगाया गया है। यहां आध्यात्मिक पुस्तकों, ध्यान साहित्य और पिरामिड से संबंधित आध्यात्मिक विज्ञान के उपकरणों की प्रदर्शनी लगाई गई है। इसके अतिरिक्त गंगा रिसॉर्ट स्थित जीएमवीएन परिसर में पंजीकृत साधकों के लिए बैंड के आधार पर अन्नप्रसाद वितरण की व्यवस्था की गई है।
आंतरिक परिवर्तन से विश्व शांति की दिशा में पहल
पांच दिवसीय महा योग ध्यान कुंभ-9 का उद्देश्य ध्यान को जनसामान्य तक पहुंचाना और बच्चों व युवाओं में मानसिक सजगता, एकाग्रता तथा सकारात्मक सोच विकसित करना है। आयोजन के माध्यम से व्यक्तिगत आंतरिक परिवर्तन को सामाजिक शांति, करुणा और सद्भाव से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
आध्यात्मिक चिंतन, सामूहिक ध्यान, स्वाध्याय और जन-जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से आयोजित यह अंतरराष्ट्रीय महोत्सव देश-विदेश से आए साधकों को एक साझा मंच प्रदान कर रहा है। आयोजकों के अनुसार, ध्यान और आत्मबोध के अभ्यास के माध्यम से व्यक्ति के भीतर सकारात्मक परिवर्तन लाना तथा उसके जरिए विश्व शांति की भावना को मजबूत करना इस आयोजन का मूल उद्देश्य है।





