उत्तराखंडटिहरी गढ़वालमुनि की रेतीरामलीला

माँ गंगा रामलीला में दशहरे पर होगा रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन

कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल की गरिमामयी उपस्थिति में होगा आयोजन, श्रीराम-भरत मिलाप और राज्याभिषेक की लीला का भी होगा मंचन

मुनिकीरेती/टिहरी(दिलीप शर्मा): माँ गंगा रामलीला समिति (रजि.), चौदह बीघा, मुनिकीरेती की ओर से आयोजित पंचम भव्य एवं दिव्य श्री रामलीला मंचन के दशम दिवस पर विजयादशमी के अवसर पर भव्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। रामलीला मैदान, नया पुल, 14 बीघा में आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल मुख्य रूप से उपस्थित रहेंगे।

कार्यक्रम का शुभारंभ श्री गणेश वंदना के साथ होगा। इसके बाद विजयादशमी के पावन पर्व पर मेघनाद, कुंभकर्ण और रावण के पुतलों का दहन किया जाएगा। पुतला दहन के माध्यम से बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की विजय का संदेश दिया जाएगा। इसके उपरांत प्रभु श्रीराम और भरत के पावन मिलाप तथा श्रीराम के राज्याभिषेक की लीला का मंचन किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल द्वारा रामलीला मंचन के समापन की औपचारिक घोषणा भी की जाएगी।

सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है विजयादशमी पर्व

विजयादशमी का पर्व समाज को सत्य, धर्म, मर्यादा और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। प्रभु श्रीराम का आदर्श जीवन यह संदेश देता है कि अंततः विजय सत्य और धर्म की ही होती है। रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों, त्याग, कर्तव्यनिष्ठा और मर्यादित जीवन के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान

इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन को सफल बनाने में समिति के अध्यक्ष संदीप परमार, मुख्य सलाहकार देवेंद्र दत्त जोशी, सलाहकार मनोज मलासी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष मनीष उनियाल, उपाध्यक्ष प्रदीप सकलानी, महासचिव अनिल बडोनी, सचिव डॉ. मनीष भट्ट, कोषाध्यक्ष जितेंद्र उनियाल, संगठन मंत्री संजय पांजा और विधि सलाहकार विकास उपाध्याय का महत्वपूर्ण योगदान है।

इसके अतिरिक्त आयुष असवाल, आशीष बिजलवान, अर्पित रावत, सोनू रावत, धर्म सिंह नेगी, केशवानंद सेमवाल और मंत्री गंगा रावत सहित समिति के समस्त पदाधिकारी एवं सदस्य आयोजन की व्यवस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

समिति के सदस्यों के अथक परिश्रम, समर्पण और सामूहिक सहयोग से आयोजित यह रामलीला क्षेत्र की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपराओं और सामाजिक एकजुटता को मजबूत करने का माध्यम बनी हुई है।

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