महा योग ध्यान कुंभ: 2030 तक 30 करोड़ लोगों तक ध्यान पहुंचाने का लक्ष्य
गंगा तट पर शास्त्रीय संगीत की स्वर लहरियों के बीच साधकों ने किया ध्यानाभ्यास, ध्यान के राष्ट्रीय विस्तार के लिए ‘देखो, सीखो और बांटो’ मॉडल पर जोर




मुनिकीरेती/टिहरी,(दिलीप शर्मा): तीर्थनगरी ऋषिकेश के मुनि की रेती स्थित स्वामी नारायण आश्रम घाट पर आयोजित नौवें महा योग ध्यान कुंभ 9.0 (MYDK 9.0) के दूसरे दिन सामूहिक ध्यान, योगाभ्यास और शास्त्रीय संगीत के माध्यम से आंतरिक शांति एवं आत्मनिरीक्षण का संदेश दिया गया। पिरामिड स्पिरिचुअल सोसाइटीज मूवमेंट (PSSM) और PMC हिंदी की ओर से आयोजित पांच दिवसीय आध्यात्मिक समागम में वर्ष 2030 तक देश के 30 करोड़ लोगों तक ध्यान का संदेश पहुंचाने की कार्ययोजना पर मंथन किया गया। कार्यक्रम में ध्यान के राष्ट्रीय विस्तार, आध्यात्मिक साहित्य के प्रचार-प्रसार, ध्यान प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण और सामाजिक सेवा से जुड़ी विभिन्न पहलों पर भी चर्चा हुई।

योगाभ्यास और सामूहिक ध्यान से हुई दिन की शुरुआत
कार्यक्रम के दूसरे दिन की शुरुआत सुबह 4:30 बजे योगाभ्यास से हुई। योगाचार्य ने साधक लवकुश तिवारी के प्रदर्शन के सहयोग से प्रतिभागियों को ताड़ासन, तिर्यक ताड़ासन, कटि चक्रासन, ग्रीवा संचालन सहित विभिन्न सूक्ष्म व्यायामों का अभ्यास कराया। इसके बाद साधकों ने सामूहिक रूप से ओंकार और गायत्री महामंत्र का जप किया।
सुबह पांच बजे से 7:30 बजे तक गंगा तट पर आयोजित मुख्य ध्यान सत्र में शास्त्रीय संगीत की मधुर स्वर लहरियों के बीच साधकों ने आनापानसति ध्यान का अभ्यास किया। इस दौरान वायलिन पर गणेश कुमार, सितार पर रामकृष्ण हेगड़े, बांसुरी पर ए.के. राघवेंद्र, मृदंगम पर कार्तिक प्रणव और तबले पर संतोष कुमार ने संगीत प्रस्तुतियां दीं।
संगीतमय वातावरण में साधकों ने अपनी स्वाभाविक आती-जाती सांसों पर ध्यान केंद्रित कर एकाग्रता और आत्मनिरीक्षण का अभ्यास किया। आयोजकों के अनुसार, इस ध्यान पद्धति में किसी मंत्र या तंत्र के बजाय सांसों के प्रति सजगता को प्रमुखता दी जाती है।

आत्मनिरीक्षण और आत्मसुधार का दिया संदेश
ध्यान सत्र के बाद पिरामिड स्पिरिचुअल सोसाइटीज मूवमेंट के संस्थापक ब्रह्मर्षि सुभाष पत्रीजी का रिकॉर्डेड संदेश प्रसारित किया गया। संदेश में उन्होंने दूसरों के विचारों और कमियों में उलझने के बजाय स्वयं के तन और मन का निरीक्षण करने तथा आत्मसुधार पर ध्यान देने का आह्वान किया।
उन्होंने आंतरिक चेतना को समझने और स्वयं के प्रति जागरूक बनने की आवश्यकता पर जोर देते हुए आत्मनिरीक्षण को व्यक्तिगत विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।

आध्यात्मिक पत्रिकाओं के 25 वर्ष पूरे होने पर विशेष चर्चा
महा योग ध्यान कुंभ के दूसरे दिन आध्यात्मिक साहित्य के प्रसार और क्षेत्रीय भाषाओं में ध्यान संबंधी सामग्री उपलब्ध कराने पर भी विशेष चर्चा हुई। ‘न्यू एज स्पिरिचुअल इंडिया’ और ‘न्यू एज स्पिरिचुअल साइंस’ पत्रिकाओं के प्रकाशन के 25वें वर्ष में प्रवेश के अवसर पर वक्ताओं ने समाज में आध्यात्मिक विचारों और ध्यान के प्रचार-प्रसार में साहित्य की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
श्रीनिवास रेड्डी ने आध्यात्मिक साहित्य को संस्था की वैचारिक पहचान बताते हुए इसके सार्वभौमिक और समग्र दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला। वहीं, सृजना वेणुगोपाल रेड्डी ने दोनों पत्रिकाओं की यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि इनके माध्यम से 1,330 से अधिक भारतीय गुरुओं और 88 आध्यात्मिक वैज्ञानिकों के विचारों को संकलित किया गया है।
हिंदी, ओडिया, गुजराती और मराठी भाषाओं में प्रकाशित पत्रिकाओं के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में ध्यान संबंधी साहित्य के विस्तार की जानकारी दी। वक्ताओं ने क्षेत्रीय भाषाओं के माध्यम से ग्रामीण और शहरी समुदायों तक ध्यान का संदेश पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
‘देखो, सीखो और बांटो’ मॉडल से ध्यान का होगा विस्तार
कार्यक्रम में PMC हिंदी की ट्रस्टी और कार्यकारी टीम ने ध्यान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए ‘देखो, सीखो और बांटो’ मॉडल की जानकारी दी। इस पहल के तहत टेलीविजन प्रसारण, यूट्यूब चैनल, PMC ऐप, 14 दिवसीय प्रारंभिक पाठ्यक्रम और 40 दिवसीय ‘मास्टर बनो’ कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को ध्यान से जोड़ने की योजना पर काम किया जा रहा है। इसके साथ ही निःशुल्क हेल्पलाइन की सुविधा के बारे में भी जानकारी दी गई।
पी.वी. रामराजू ने बताया कि PMC का उपग्रह प्रसारण लगभग तीन करोड़ घरों तक पहुंच चुका है। उन्होंने जानकारी दी कि इस वर्ष उत्तर भारत और पूर्वोत्तर के विभिन्न क्षेत्रों में 15 ध्यान यज्ञ आयोजित किए गए हैं। आगामी समय में श्रीनगर, केरल, मिजोरम और त्रिपुरा में राज्यस्तरीय आयोजन प्रस्तावित हैं।
वक्ताओं ने साधकों से अपने परिवार, मित्रों और आसपास के लोगों को ध्यान से जोड़ने तथा PMC ऐप के प्रचार-प्रसार में सहयोग करने की अपील की। इसके अलावा आगामी मार्च से प्रस्तावित आठ सप्ताह के मेडिटेशन टीचर ट्रेनिंग प्रोग्राम की जानकारी भी साझा की गई। आयोजकों ने वर्ष 2030 तक 30 करोड़ लोगों तक ध्यान पहुंचाने के लक्ष्य को दोहराते हुए प्रशिक्षित ध्यान शिक्षकों का व्यापक नेटवर्क तैयार करने पर जोर दिया।
सामाजिक सरोकारों से भी जुड़ेगा ध्यान अभियान
कार्यक्रम के दौरान ‘पॉजिटिव समाचार’, ‘प्रोजेक्ट आजादी’ और ‘ध्यान ग्रामीण’ जैसी पहलों पर चर्चा की गई। इन पहलों के माध्यम से सकारात्मक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने, जेलों में बंद कैदियों तक ध्यान पहुंचाने और ग्रामीण क्षेत्रों में ध्यान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों की जानकारी दी गई।
स्वास्थ्य संबंधी सत्र में डॉ. सौरभ रंजन ने ध्यान और स्वास्थ्य के विषय पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने PMC के ‘डॉक्टर से पूछो’ कार्यक्रम के बारे में भी जानकारी दी। वक्ताओं ने नियमित ध्यान, शाकाहार और आत्मजागरूकता को इस अभियान के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल बताया।
ध्यान से जीवन में सकारात्मक बदलाव का अनुभव साझा किया
समापन सत्र में PMC चैनल की प्रोडक्शन टीम के सदस्यों को सम्मानित किया गया। इस दौरान वरिष्ठ प्रोड्यूसर नम्रता ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि पारिवारिक शोक और मानसिक तनाव के दौर में ध्यान से जुड़ने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया।
आयोजन के दौरान आश्रम परिसर में स्थापित स्टूडियो में साधकों के ध्यान संबंधी अनुभवों का वीडियो दस्तावेजीकरण भी किया जा रहा है, ताकि उनके अनुभवों को व्यापक स्तर पर साझा किया जा सके।
महा योग ध्यान कुंभ के दूसरे दिन की गतिविधियों में व्यक्तिगत साधना के साथ ध्यान के सामाजिक विस्तार, आध्यात्मिक साहित्य और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को प्रमुखता दी गई। आयोजकों ने आधुनिक संचार माध्यमों, क्षेत्रीय भाषाओं और सामूहिक प्रयासों के जरिए ध्यान को अधिकाधिक लोगों तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता दोहराई।





