उत्तराखंडटिहरी गढ़वालमुनि की रेतीशाकाहार रैली

ऋषिकेश में महायोग ध्यान कुंभ-9 का भव्य समापन, 108 घंटे का अखंड ध्यान संपन्न

अगले वर्ष 13 से 18 अक्टूबर तक आयोजित होगा महायोग ध्यान कुंभ-10, 20 हजार से अधिक साधकों के जुटने का लक्ष्य

  • शाकाहार और अहिंसा के संदेश के साथ निकाली गई जन-जागरूकता रैली, 11 नवंबर को देशभर में होंगी 1,008 शाकाहार रैलियां

ऋषिकेश, 27 अक्टूबर(दिलीप शर्मा): मां गंगा के पावन तट मुनि की रेती स्थित स्वामीनारायण आश्रम घाट पर आयोजित पांच दिवसीय महायोग ध्यान कुंभ-9 (MYDK 2026) का मंगलवार को भव्य समापन हो गया। पिरामिड स्पिरिचुअल सोसाइटीज मूवमेंट (PSSM) और पीएमसी हिंदी के संयुक्त आयोजन में देश-विदेश से पहुंचे 10 हजार से अधिक साधकों ने ध्यान, आध्यात्मिक चिंतन और संगीत साधना में सहभागिता की। आयोजन के दौरान 108 घंटे तक चले अखंड ध्यान की पूर्णाहुति हुई। समापन अवसर पर अगले वर्ष महायोग ध्यान कुंभ-10 के आयोजन की घोषणा भी की गई।

आयोजकों के अनुसार, महायोग ध्यान कुंभ-10 का आयोजन 13 से 18 अक्टूबर 2027 तक मुनि की रेती स्थित इसी पावन तट पर किया जाएगा। अगले आयोजन में 20 हजार से अधिक साधकों की सहभागिता का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान आयोजन को ध्यान, शाकाहार, अहिंसा और विश्व शांति के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया गया।

108 घंटे के अखंड ध्यान की हुई पूर्णाहुति

महायोग ध्यान कुंभ के अंतर्गत 22 अक्टूबर की शाम सात बजे शुरू हुआ 108 घंटे का अखंड ध्यान 27 अक्टूबर की सुबह सात बजे सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस दौरान साधकों ने निरंतर ध्यान साधना कर आध्यात्मिक अनुशासन और आत्मचिंतन का अभ्यास किया। शरद पूर्णिमा पर आयोजित विशेष ध्यान सत्र में भी बड़ी संख्या में साधकों ने भाग लिया। आयोजकों के मुताबिक, कुछ साधकों ने 24 से 72 घंटे तक लगातार ध्यान साधना की और इस दौरान अन्न ग्रहण नहीं किया।

कार्यक्रम में ध्यान को मानसिक शांति, आत्मबोध और आंतरिक परिवर्तन का माध्यम बताते हुए नियमित साधना अपनाने का आह्वान किया गया।

ब्रह्मर्षि सुभाष पत्रीजी के संदेश को किया याद

समापन सत्र में PSSM के संस्थापक ब्रह्मर्षि सुभाष पत्रीजी के ध्यान संबंधी संदेशों का स्मरण किया गया। साधकों को आनापानसति यानी आती-जाती सांसों के प्रति सजग रहने की ध्यान पद्धति के महत्व से अवगत कराया गया।

वक्ताओं ने संदेश दिया कि ध्यान के माध्यम से व्यक्ति स्वयं को समझने, परिस्थितियों में संतुलन बनाए रखने और जीवन में संतुष्टि का भाव विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। इस अवसर पर वर्ष 2030 तक ‘ध्यान जगत, शाकाहार जगत और पिरामिड जगत’ की स्थापना के संकल्प को भी दोहराया गया।

शाकाहार और अहिंसा के समर्थन में निकाली रैली

महायोग ध्यान कुंभ के समापन के बाद स्वामीनारायण आश्रम से मुनि की रेती तक शाकाहार और अहिंसा के समर्थन में जन-जागरूकता रैली निकाली गई। सफेद वस्त्रों में शामिल साधकों ने शाकाहार अपनाने, जीवों के प्रति करुणा रखने और अहिंसक जीवनशैली को बढ़ावा देने का संदेश दिया।

आयोजकों ने शाकाहार को केवल खानपान तक सीमित न रखते हुए इसे करुणा, संवेदनशीलता और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी से जोड़ने पर जोर दिया।

11 नवंबर को देशभर में होंगी 1,008 शाकाहार रैलियां

समापन समारोह में घोषणा की गई कि ब्रह्मर्षि सुभाष पत्रीजी के जन्मोत्सव के अवसर पर 11 नवंबर 2026 को ‘शाकाहार धर्म महाचक्रम’ के अंतर्गत देशभर में एक साथ 1,008 शाकाहार जागरूकता रैलियां आयोजित की जाएंगी। इन रैलियों के माध्यम से लोगों को शाकाहार, अहिंसा और करुणा आधारित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

आयोजकों ने इसे शाकाहार के प्रति सामाजिक जागरूकता बढ़ाने और व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने की पहल बताया।

पिरामिड कैलेंडर-2027 का विमोचन

कार्यक्रम के दौरान वर्ष 2027 के लिए विशेष त्रिआयामी पिरामिड आकार के आध्यात्मिक कैलेंडर का विमोचन किया गया। इसमें वर्षभर की पूर्णिमा, अमावस्या और ध्यान महोत्सवों से संबंधित तिथियों को संकलित किया गया है। इसके माध्यम से साधकों को आगामी आध्यात्मिक कार्यक्रमों की जानकारी उपलब्ध कराने का उद्देश्य रखा गया है।

इसके साथ ही आगामी 21 से 31 दिसंबर 2026 तक कैलाशपुरम स्थित शक्ति स्थल में आयोजित होने वाले 11 दिवसीय ‘पत्रीजी ध्यान महायागम’ के लिए साधकों को आमंत्रित किया गया।

आध्यात्मिक मार्गदर्शन के साथ संगीत ध्यान बना आकर्षण

महायोग ध्यान कुंभ में आध्यात्मिक मार्गदर्शन के साथ संगीत ध्यान के सत्र भी आयोजित किए गए। कार्यक्रम से जुड़े प्रमुख मार्गदर्शकों में स्वर्णलता पत्रीजी (पत्री अम्मा), वसंता शास्त्री (वसंता अम्मा), आलेख्या शास्त्री, अमूल्य शास्त्री और आशा बहन शामिल रहे।

संगीत ध्यान सत्रों में वायलिन वादक एवं संगीत निर्माता गणेश कुमार, सितार वादक रामकृष्ण हेगड़े, बांसुरी वादक ए.के. राघवेंद्र, मृदंगम वादक कार्तिक प्रणव और तबला वादक संतोष कुमार ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से साधकों को ध्यान और संगीत के समन्वय का अनुभव कराया।

विभिन्न सेवा दलों ने संभाली व्यवस्थाएं

पांच दिवसीय आयोजन को सफल बनाने के लिए विभिन्न विभागों के स्वयंसेवकों और सेवा दलों ने जिम्मेदारियां निभाईं। प्रशासनिक स्वीकृतियों एवं अनुमतियों की व्यवस्था भूपेंद्र सिंह रावत और अभिषेक अवधानी ने संभाली। पंजीकरण और तकनीकी व्यवस्थाओं में देवजानी, साई जाले सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने योगदान दिया,मिडिया एवं प्रचार प्रसार में मनीष भल्ला ने बखूबी अपने कार्य को किया।

आवास एवं परिवहन व्यवस्था में उदयवीर सिंह, संजीव सिंह, संजय चौहान, मुनीष कुंद्रा और शैली चावला की भूमिका रही। अतिथियों एवं वक्ताओं के सत्कार की जिम्मेदारी वंदना जैन, हार्दिक मालविया और कबीर लालचंदानी सहित अन्य सदस्यों ने निभाई।

पंडाल, विद्युत और संरचना संबंधी व्यवस्थाओं में विजय कुमार सिंह, पार्थिव, दीपक नायक, सचिन और डॉ. मंदार ने सहयोग किया। अन्नप्रसादम सेवा में मनोज ददलानी, जतिन भाई पटेल, निखिल खुरानिया और मीनाक्षी खुरानिया सहित अन्य सदस्यों ने योगदान दिया। आयोजन में कैथल टीम की ओर से शुद्ध मूंगफली तेल और देसी घी की व्यवस्था में भी सहयोग किया गया।

मंच एवं बैकस्टेज संचालन की जिम्मेदारी श्वेता शर्मा ने संभाली, जबकि प्रसारण, साउंड और एलईडी व्यवस्था में बालाजी टीम, ऑडियो इंजीनियर रोहित और बिग बैंग प्रोडक्शंस ने सहयोग किया। ऊर्जा मेला, साहित्य वितरण, स्वच्छता अभियान और अखंड ध्यान के संचालन में भी विभिन्न सेवा दल सक्रिय रहे।

जागृत किड्स एवं युवा प्रकोष्ठ के अंतर्गत निराली, मधुमिता, उपाली और उल्का सहित अन्य सदस्यों ने सहभागिता की।

ध्यान, शाकाहार और विश्व शांति का संदेश देकर विदा हुए साधक

महायोग ध्यान कुंभ-9 का समापन ध्यान साधना, शाकाहार जागरूकता और आध्यात्मिक सहभागिता के संदेश के साथ हुआ। आयोजकों ने आगामी वर्ष महायोग ध्यान कुंभ-10 को और व्यापक स्तर पर आयोजित करने का संकल्प व्यक्त किया। वर्ष 2027 में 20 हजार से अधिक साधकों को एकत्र करने का लक्ष्य इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक सहभागिता के अगले चरण के रूप में प्रस्तुत करता है।

Related Articles

Back to top button