अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सवउत्तराखंडऋषिकेश

अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव 2026 का भव्य समापन, 80 देशों के साधकों ने दिया विश्व शांति का संदेश

परमार्थ निकेतन के गंगा तट पर सामूहिक योग, विश्व शांति यज्ञ और “प्रेम योग” सत्र के साथ सात दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय आयोजन संपन्न

ऋषिकेश, 15 मार्च(दिलीप शर्मा): ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव 2026 का रविवार को भव्य समापन हो गया। महोत्सव के अंतिम दिन विश्व के लगभग 80 देशों से आए 1500 से अधिक योग साधक, योगाचार्य, राजनयिक और विद्यार्थी माँ गंगा के पावन तट पर एकत्रित हुए।

दिन की शुरुआत सामूहिक योग साधना से हुई और समापन परमार्थ गंगा आरती, संगीत, नृत्य और आनंदमय उत्सव के साथ हुआ। एक सप्ताह तक चले इस अंतर्राष्ट्रीय आयोजन में योग, अध्यात्म, ज्ञान सत्र और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से विश्व शांति और मानव एकता का संदेश दिया गया।

महोत्सव के अंतिम दिन परमार्थ निकेतन के घाट पर भगवान शिव की विशाल प्रतिमा के समक्ष योगाचार्य गंगा नंदिनी के नेतृत्व में विशेष सामूहिक योग प्रोटोकॉल का आयोजन किया गया। इसमें विभिन्न देशों के राजदूत, उच्चायुक्त और योगाचार्यों ने एक साथ योगाभ्यास किया।

यह आयोजन अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) की 100 दिवसीय उलटी गिनती के 98वें दिन के रूप में भी विशेष रहा। प्रतिभागियों ने अपने दैनिक जीवन में योग को अपनाने और 21 दिसंबर को मनाए जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय ध्यान दिवस के महत्व को भी साझा किया।

महोत्सव का आयोजन स्वामी चिदानन्द सरस्वती और साध्वी भगवती सरस्वती के मार्गदर्शन में भारत सरकार के आयुष मंत्रालय तथा पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से किया गया।

इस अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि भारत केवल एक भूभाग नहीं, बल्कि एक चेतना है जो “वसुधैव कुटुम्बकम्” और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि योग मन, आत्मा और सम्पूर्ण मानवता को जोड़ने वाला सेतु है।

साध्वी भगवती सरस्वती ने “प्रेम योग” विषय पर आयोजित विशेष सत्र में कहा कि प्रेम मनुष्य के शरीर, मन और संबंधों को सकारात्मक रूप से बदल देता है। आधुनिक विज्ञान भी यह स्वीकार कर चुका है कि प्रेम मानव स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए अत्यंत लाभकारी है।

महोत्सव के दौरान योग, प्राणायाम, ध्यान, योग थेरेपी, मंत्र ध्यान, कीर्तन और आध्यात्मिक संवाद जैसे अनेक सत्र आयोजित किए गए। प्रातःकालीन कार्यक्रमों में हिमालय के सूर्योदय के साथ मंत्रोच्चार और योग सत्रों ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

अंतिम दिवस पर “द योग ऑफ लव – ओपनिंग द हार्ट ऐज अ पाथ ऑफ अवेकनिंग” विषय पर विशेष आध्यात्मिक संवाद आयोजित किया गया, जिसमें संतों और योगाचार्यों ने प्रेम, करुणा और भक्ति को योग का वास्तविक सार बताया।

समापन समारोह में काकाओ सेरेमनी, एलिमेंटल डांस और सेक्रेड साउंड्स जैसे कार्यक्रमों के साथ प्रतिभागियों ने आनंदमय उत्सव मनाया। माँ गंगा के पावन तट पर आयोजित यह अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव विश्व शांति, आध्यात्मिक जागरण और मानव एकता के संदेश के साथ सम्पन्न हुआ।

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