उत्तराखंडऋषिकेश

भ्रामक खबरों पर महिला आयोग का कड़ा रुख, कहा—पीड़िता को न्याय के साथ परिवार की निजता भी सर्वोपरि

अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने स्पष्ट की कार्यवाही—मामले में पुलिस जांच जारी, 16 अप्रैल तक रिपोर्ट तलब

ऋषिकेश/देहरादून,06 अप्रैल(दिलीप शर्मा):उत्तराखंड राज्य महिला आयोग ने सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही भ्रामक और असत्य टिप्पणियों पर कड़ा रुख अपनाया है। आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने स्पष्ट किया कि आयोग किसी भी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए विधिक प्रक्रिया के तहत ही कार्य करता है और बिना पूर्ण जांच के कोई भी एकपक्षीय निर्णय नहीं लिया जाता।

अध्यक्ष ने जानकारी देते हुए बताया कि ऋषिकेश से संबंधित एक संवेदनशील पारिवारिक प्रकरण में आयोग ने 06 फरवरी 2026 को शिकायत प्राप्त होते ही तत्काल संज्ञान लिया था। पीड़िता द्वारा परिवार पर मारपीट, प्रॉपर्टी विवाद और जबरन देहव्यापार जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। मामले की सुनवाई के तहत 24 फरवरी 2026 को दोनों पक्षों को काउंसलिंग के लिए बुलाया गया, लेकिन विपक्षी पक्ष की अनुपस्थिति के कारण प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने पीड़िता की सहमति से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, देहरादून को पत्र भेजकर निष्पक्ष एवं गहन जांच के निर्देश दिए हैं। आयोग ने 16 अप्रैल 2026 तक विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। फिलहाल पुलिस द्वारा जांच जारी है और रिपोर्ट मिलने के बाद साक्ष्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

कुसुम कंडवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई मामला न्यायालय में विचाराधीन होता है, तो आयोग उसमें हस्तक्षेप नहीं करता। ऐसी स्थिति में शिकायतकर्ता आयोग से जांच रिपोर्ट की प्रति प्राप्त कर सकती है।

सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि महिला आयोग किसी भी पारिवारिक या निजी विवाद को स्वयं सार्वजनिक मंचों या सोशल मीडिया पर प्रसारित नहीं करता। आयोग का उद्देश्य पीड़ित महिला को न्याय दिलाने के साथ-साथ परिवार की निजता और मर्यादा को बनाए रखना है, ताकि सुलह और सुधार की संभावनाएं बनी रहें।

उन्होंने कहा कि आयोग केवल उन्हीं मामलों में आधिकारिक जानकारी साझा करता है, जो पहले से मीडिया में सार्वजनिक हो चुके होते हैं। जब तक संबंधित पक्ष स्वयं मामले को सार्वजनिक नहीं करता, तब तक आयोग अपनी ओर से कोई बयान जारी नहीं करता।

अंत में आयोग अध्यक्ष ने नागरिकों से अपील की कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित अर्ध-सत्यों और भ्रामक सूचनाओं पर विश्वास न करें। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना तथ्यों के आयोग की छवि धूमिल करने का प्रयास न केवल अनुचित है, बल्कि विधिक प्रक्रिया में भी बाधा उत्पन्न करता है। आयोग प्रदेश की प्रत्येक पीड़ित महिला के लिए एक सशक्त सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करता रहेगा।

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