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नारी शक्ति वंदन अधिनियम: महिलाओं को नीति की निर्माता बनाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल – कुसुम कंडवाल

महिला नेतृत्व से तेज़ होगी अर्थव्यवस्था, लोकतंत्र का स्वर्णिम अध्याय है यह अधिनियम

देहरादून,11अप्रैल(दिलीप शर्मा): उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने आज देहरादून स्थित सचिवालय के मीडिया सेंटर में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता को संबोधित किया। इस दौरान समाजसेवी डॉ. पारुल दीक्षित एवं अधिवक्ता शिखा शर्मा बिष्ट भी उपस्थित रहीं।

भारतीय लोकतंत्र के लिए मील का पत्थर

प्रेस वार्ता में कुसुम कंडवाल ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023 को भारतीय लोकतंत्र का “स्वर्णिम अध्याय” बताते हुए कहा कि यह केवल एक कानून नहीं, बल्कि विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

उन्होंने 16 अप्रैल को प्रस्तावित संसद की महत्वपूर्ण बैठक का उल्लेख करते हुए कहा कि यह अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में निर्णायक साबित होगा।

महिलाओं को मिलेगा 33% राजनीतिक प्रतिनिधित्व

अध्यक्ष ने जानकारी दी कि सितंबर 2023 में पारित इस संवैधानिक संशोधन के तहत लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए एक-तिहाई (33%) सीटों का आरक्षण सुनिश्चित किया गया है।

उन्होंने बताया कि 1952 में लोकसभा में महिलाओं की संख्या केवल 22 थी, जो 2024 में बढ़कर 75 तक पहुंची है, लेकिन अभी भी यह पर्याप्त नहीं है। यह अधिनियम इस अंतर को कम कर महिलाओं को नीति निर्माण के केंद्र में लाएगा।

महिला-नेतृत्व वाला विकास बनेगा नई दिशा

कुसुम कंडवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन की सराहना करते हुए कहा कि भारत अब “महिलाओं के विकास” से आगे बढ़कर “महिला-नेतृत्व वाले विकास” की ओर अग्रसर है।
उन्होंने कहा,

“जब महिलाएँ नेतृत्व करती हैं, तो अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ती है और समावेशी विकास सुनिश्चित होता है।”

वैश्विक शोध का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि लैंगिक समानता से विश्व अर्थव्यवस्था में लगभग 7 ट्रिलियन डॉलर की वृद्धि संभव है।

महिला सशक्तिकरण की दिशा में प्रमुख उपलब्धियाँ

प्रेस वार्ता के दौरान महिला सशक्तिकरण से जुड़े कई महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए गए:

  • मुद्रा योजना के तहत 69% ऋण महिलाओं को प्रदान किए गए
  • जन धन योजना के अंतर्गत 32.29 करोड़ महिलाओं के बैंक खाते खुले
  • ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ से माध्यमिक स्तर पर 80.2% नामांकन
  • भारत में 43% STEM ग्रेजुएट महिलाएँ
  • सुकन्या समृद्धि योजना के तहत 4.6 करोड़ से अधिक खाते

इसके अलावा:

  • उज्ज्वला योजना के तहत 10 करोड़ LPG कनेक्शन
  • जल जीवन मिशन के अंतर्गत 14.45 करोड़ घरों में नल से जल
  • प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से 4.27 करोड़ महिलाओं को लाभ

सामाजिक बदलाव में महिलाओं की निर्णायक भूमिका

अध्यक्ष ने कहा कि जब महिलाओं को संवैधानिक अवसर मिलते हैं, तो वे जल, शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों में व्यापक परिवर्तन लाती हैं।

उन्होंने इस अधिनियम को @2047 के विकसित भारत संकल्प की आधारशिला बताते हुए कहा कि यह भारत को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान देगा।

उत्तराखंड में क्रियान्वयन को लेकर आयोग प्रतिबद्ध

कुसुम कंडवाल ने कहा कि उत्तराखंड न केवल देवभूमि है, बल्कि नारी शक्ति की भूमि भी है। राज्य महिला आयोग इस अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, जिससे आगामी चुनावों में महिलाओं की भागीदारी बढ़े और लोकतंत्र अधिक पारदर्शी एवं संवेदनशील बने।

समाज से सहयोग का आह्वान

प्रेस वार्ता के अंत में उन्होंने कहा:

“यह अधिनियम महिलाओं को ‘नीति की लाभार्थी’ से ‘नीति की निर्माता’ बनने का मार्ग प्रशस्त करेगा।”

उन्होंने समस्त मातृशक्ति एवं समाज के सभी वर्गों से इस ऐतिहासिक परिवर्तन का समर्थन करने की अपील की।

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