उत्तराखंडचार धाम यात्रादेहरादूनसमीक्षा बैठक

चारधाम यात्रा का मूल मंत्र ‘सुरक्षित यात्रा, सुगम दर्शन और सतत संवाद’: मुख्यमंत्री धामी

मानसून को देखते हुए सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और संचार व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश

देहरादून, 2 जून(दिलीप शर्मा): मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चारधाम यात्रा व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि यात्रा प्रबंधन का मूल मंत्र ‘सुरक्षित यात्रा, सुगम दर्शन और सतत संवाद’ होना चाहिए। मंगलवार को सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए यात्रा मार्गों और धामों में सभी व्यवस्थाओं को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चारों धामों में श्रद्धालुओं की संख्या के अनुरूप दर्शन व्यवस्था के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की जाए। उन्होंने रात्रि 10 बजे से सुबह 4 बजे तक यात्रा मार्गों पर वाहनों की आवाजाही पर लगाए गए प्रतिबंध का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही भारी वाहनों को केवल रात्रिकाल में ही संचालन की अनुमति देने को कहा।

भीड़ प्रबंधन के लिए चरणबद्ध व्यवस्था अपनाने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि किसी भी धाम अथवा पड़ाव पर निर्धारित क्षमता से अधिक भीड़ होने की स्थिति में होल्डिंग एरिया और प्रमुख चेक प्वाइंट्स पर यात्रियों एवं वाहनों की आवाजाही नियंत्रित की जाए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं को केवल रोका न जाए, बल्कि उन्हें प्रतीक्षा अवधि, कारण और आगे की व्यवस्थाओं की स्पष्ट जानकारी भी दी जाए।

होल्डिंग एरिया में पार्किंग, भोजन, पेयजल, शौचालय और अन्य मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए।

सूचना तंत्र को और मजबूत बनाने पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि यात्रियों को किसी भी परिस्थिति में सूचना के अभाव का सामना नहीं करना चाहिए। इसके लिए सार्वजनिक सूचना प्रणाली, एलईडी डिस्प्ले, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, व्हाट्सएप चैनल और एफएम रेडियो के माध्यम से नियमित अपडेट जारी किए जाएं। मौसम परिवर्तन, मार्ग अवरोध, यातायात जाम और दर्शन में विलंब जैसी सूचनाएं समय पर यात्रियों तक पहुंचाई जाएं।

मानसून अवधि को देखते हुए विभागों को अलर्ट रहने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा अब दूसरे और अधिक चुनौतीपूर्ण चरण में प्रवेश कर रही है, जहां मानसून और प्रतिकूल मौसम प्रमुख चुनौती होंगे। उन्होंने संवेदनशील स्थलों पर जेसीबी, पोकलैंड मशीन, सैटेलाइट फोन, एम्बुलेंस और राहत-बचाव उपकरणों की अग्रिम तैनाती सुनिश्चित करने को कहा।

साथ ही अधिकारियों को फील्ड में रहकर व्यवस्थाओं का नियमित निरीक्षण करने और श्रद्धालुओं को त्वरित सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

स्वच्छता, स्वास्थ्य और खाद्य गुणवत्ता पर विशेष फोकस

मुख्यमंत्री ने चारों धामों एवं पैदल यात्रा मार्गों पर स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने को कहा। पैदल मार्गों पर पर्याप्त शौचालयों की व्यवस्था तथा उनकी नियमित सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। गंभीर मरीजों के लिए हेली एम्बुलेंस सेवा के समन्वय हेतु राज्य स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश भी दिए गए।

इसके अलावा यात्रा मार्गों पर संचालित होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों में रेट लिस्ट का अनिवार्य प्रदर्शन तथा खाद्य पदार्थों की नियमित सैंपलिंग कर गुणवत्ता जांच सुनिश्चित करने को कहा गया।

टिहरी प्रशासन ने प्रस्तुत की जिले की तैयारियां

बैठक में जनपद टिहरी गढ़वाल से जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल , एसएसपी श्वेता चौबे तथा आईएएस प्रशिक्षु ज्योति ने प्रतिभाग किया।

जिलाधिकारी ने बताया कि मुनि की रेती क्षेत्र में वीकेंड के दौरान पर्यटकों की भारी आवाजाही को देखते हुए वनवे व्यवस्था लागू कर यातायात को सुचारू रखा जाता है। वहीं एसएसपी ने जानकारी दी कि ढालवाला, तपोवन से शिवपुरी तक अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

उन्होंने बताया कि वीकेंड के दौरान राफ्टिंग गतिविधियों के कारण यातायात की गति प्रभावित होती है, फिर भी ट्रैफिक व्यवस्था सामान्य एवं नियंत्रित बनी रहती है। साथ ही रात्रिकाल में पर्वतीय मार्गों पर यात्रा न करने के लिए लोगों को लगातार जागरूक किया जा रहा है तथा नियमित चेकिंग अभियान भी चलाए जा रहे हैं।

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