
ऋषिकेश, 02 जून(दिलीप शर्मा): चारधाम यात्रा, राफ्टिंग सीजन और गर्मी की छुट्टियों के चलते ऋषिकेश के गंगा घाटों पर बढ़ती भीड़ के बीच SDRF की सतर्कता ने एक बड़ा हादसा टाल दिया। नीम बीच घाट पर मोबाइल फोन से रील बना रहे हरियाणा निवासी एक युवक का पैर फिसलने से वह गंगा नदी के तेज बहाव में जा गिरा, लेकिन मौके पर तैनात SDRF टीम की त्वरित कार्रवाई से उसकी जान बचा ली गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार आयुष कुमार (20 वर्ष), पुत्र श्री ओमप्रकाश, निवासी गुरुग्राम (हरियाणा) मंगलवार को नीम बीच घाट पर अपने साथियों के साथ मौजूद था। इसी दौरान वह मोबाइल से रील बनाने का प्रयास कर रहा था, तभी अचानक संतुलन बिगड़ने से उसका पैर फिसल गया और वह गंगा की धारा में बहने लगा।
घटना होते ही घाट पर ड्यूटी में तैनात SDRF के हेड कांस्टेबल किशोर कुमार ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए बिना देर किए गंगा नदी में छलांग लगा दी। वहीं अन्य जवानों ने थ्रो-बैग की सहायता से बचाव अभियान शुरू किया। टीम के समन्वित प्रयासों से युवक तक शीघ्र पहुंच बनाकर उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
रेस्क्यू अभियान के दौरान 40वीं वाहिनी पीएसी आपदा राहत दल की टीम ने भी SDRF के साथ तालमेल स्थापित करते हुए बचाव कार्य में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया। दोनों टीमों की तत्परता, कुशलता और पेशेवर कार्यशैली के चलते एक युवक की जान सुरक्षित बचाई जा सकी।
सुरक्षित बाहर निकाले जाने के बाद आयुष कुमार एवं उसके साथियों ने SDRF और 40वीं वाहिनी पीएसी की टीम का आभार व्यक्त करते हुए उनके साहस एवं सेवा भावना की सराहना की।
SDRF ने इस घटना के माध्यम से श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों से अपील की है कि गंगा नदी के किनारे रील बनाने, सेल्फी लेने अथवा तेज बहाव वाले क्षेत्रों में जाने से बचें तथा केवल निर्धारित और सुरक्षित स्थानों पर ही स्नान करें।
रेस्क्यू टीम में शामिल रहे:
- ADSI रवि रावत
- हेड कांस्टेबल किशोर कुमार
- कांस्टेबल रजत तोमर
SDRF की मुस्तैदी और साहसिक कार्यवाही एक बार फिर यह साबित करती है कि उत्तराखंड में आपदा एवं दुर्घटना की हर चुनौती से निपटने के लिए जवान पूरी तरह तैयार हैं।










