उत्तराखंडटिहरी गढ़वाल

जल स्रोतों की मैपिंग और संरक्षण पर जोर, हर ग्राम का बनेगा ‘वन-पेजर’

जिला समन्वय समिति एवं जिला स्तरीय कार्यकारी समिति की बैठक में डीएम ने दिए समन्वित कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश

टिहरी गढ़वाल,10 जून(दिलीप शर्मा): जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल की अध्यक्षता में जिला समन्वय समिति एवं SARRA की जिला स्तरीय कार्यकारी समिति (DLEC) की बैठक आयोजित की गई, जिसमें जल संरक्षण, जल स्रोतों के पुनर्जीवन तथा जलवायु अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने संबंधी विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की गई।

बैठक में जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जिन जल स्रोतों में पूर्व में पानी उपलब्ध था, उनकी भी मैपिंग कर वर्तमान स्थिति का आकलन किया जाए। उन्होंने वन विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर कार्ययोजना तैयार करने तथा वन पंचायतों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान (NIH) की जल संसाधन संबंधी रिपोर्ट का विस्तृत अध्ययन कर आवश्यक जानकारी जुटाने को कहा।

मुख्य विकास अधिकारी वरुणा अग्रवाल ने प्रत्येक ग्राम का एक ‘वन-पेजर’ तैयार करने के निर्देश दिए, जिसमें बंजर एवं कृषि योग्य भूमि, सिंचित क्षेत्र, निर्धारित अवधि में किए गए कार्यों का प्रभाव तथा प्राप्त परिणामों का स्पष्ट विवरण दर्ज किया जाएगा। इससे योजनाओं की प्रगति और उपलब्धियों का प्रभावी मूल्यांकन संभव हो सकेगा।

उप निदेशक सर्वेश्वर ने जल संरक्षण अभियान की रणनीति प्रस्तुत करते हुए जनभागीदारी बढ़ाने, सूख रहे जल स्रोतों, सहायक नदियों एवं धाराओं के पुनर्जीवन, जलागम क्षेत्रों के उपचार, भागीरथी मोबाइल ऐप के माध्यम से चिन्हित जल स्रोतों के संरक्षण तथा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व वाले धारे-नालों के जीर्णोद्धार की जानकारी दी। उन्होंने ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन रिवर’ अभियान के तहत चयनित नदियों और उनकी सहायक धाराओं के संरक्षण में जनसहभागिता और क्षमता विकास पर भी बल दिया।

बैठक में विश्व बैंक वित्तपोषित उत्तराखंड जलवायु अनुकूलीकरण बरानी कृषि परियोजना की कार्ययोजना एवं प्रगति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि परियोजना का उद्देश्य चयनित सूक्ष्म जलागम क्षेत्रों में पर्वतीय कृषि को अधिक लाभकारी, जलवायु अनुकूल एवं पर्यावरणीय दृष्टि से टिकाऊ बनाना है।

परियोजना के प्रदर्शन सूचकों की जानकारी देते हुए बताया गया कि कृषि भूमि से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 5 प्रतिशत कमी, लक्षित फसलों की उत्पादकता में 20 प्रतिशत वृद्धि, स्प्रिंगशेड क्षेत्रों में जल उपलब्धता में 30 प्रतिशत वृद्धि तथा कृषक परिवारों की कृषि आधारित आय में 25 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य प्राप्त किया गया है।

बैठक में डीएफओ संदीपा शर्मा, हिम्मोथन सोसाइटी के दर्शन सिंह एवं दुर्गा प्रसाद, लघु सिंचाई विभाग के डी.सी. मिश्रा, कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ. आलोक येवले तथा ग्रामीण विकास विभाग के महाबीर सिंह, रोशन लाल सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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