ऋषिकेश में गूंजा नारी सम्मान का संकल्प, ‘सम्मान सेतु’ शिविर से हजारों महिलाओं और श्रद्धालुओं को मिला कानूनी व स्वास्थ्य लाभ
राज्य महिला आयोग अध्यक्ष कुसुम कंडवाल बोलीं— हर पीड़ित महिला तक न्याय और संरक्षण पहुंचाना ही अभियान का उद्देश्य, तकनीक व कानून से महिलाओं को सशक्त बनाने पर भी जोर

ऋषिकेश, 7 अगस्त(दिलीप शर्मा): उत्तराखंड राज्य महिला आयोग द्वारा राष्ट्रीय महिला आयोग के विशेष सहयोग से आयोजित पांच दिवसीय ‘सम्मान सेतु’ अभियान ऋषिकेश में महिलाओं के अधिकार, सुरक्षा और सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। 4 से 8 अगस्त तक सीमा डेंटल कॉलेज के सामने संचालित इस विशेष शिविर में कांवड़ यात्रा के दौरान महिलाओं, श्रद्धालुओं और आम नागरिकों की बड़ी संख्या में भागीदारी देखने को मिली।
शुक्रवार को आयोजित प्रेस वार्ता में उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा कि आयोग का स्पष्ट उद्देश्य प्रत्येक पीड़ित महिला को समय पर न्याय, संरक्षण और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि महिलाएं अपनी समस्याओं के समाधान के लिए कहीं भटकें नहीं, बल्कि आयोग स्वयं उनके द्वार तक पहुंचकर सहायता प्रदान कर रहा है। फोन, स्थानीय पुलिस, प्रशासन और संबंधित विभागों के समन्वय से कई मामलों का मौके पर ही समाधान किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आयोग केवल शिकायतों का निस्तारण करने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक अभिभावक की भूमिका निभाते हुए पीड़ित महिलाओं को संरक्षण देना, टूटते परिवारों को परामर्श के माध्यम से जोड़ना और प्रत्येक जरूरतमंद महिला तक सहायता पहुंचाना इस अभियान की प्राथमिकता है। उन्होंने कांवड़ यात्रा को सामाजिक जागरूकता का माध्यम बताते हुए कहा कि यह केवल आस्था का पर्व नहीं, बल्कि नारी सम्मान, सुरक्षा और सामाजिक संवेदनशीलता का संदेश देने का भी महत्वपूर्ण अवसर है।
हजारों लोगों तक पहुंची महिला अधिकारों की जानकारी
‘सम्मान सेतु’ शिविर के माध्यम से अब तक 7,200 से अधिक जागरूकता किट वितरित की जा चुकी हैं। इन किटों में महिला अधिकारों, नए आपराधिक कानूनों, POSH Act तथा नारी शक्ति वंदन अधिनियम से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी शामिल की गई, ताकि महिलाओं के साथ-साथ आम नागरिक भी अपने अधिकारों और कानूनी प्रावधानों के प्रति जागरूक हो सकें।
निःशुल्क कानूनी सहायता और पारिवारिक विवादों का समाधान
शिविर में मौजूद अधिवक्ताओं ने अब तक 578 लोगों को निःशुल्क कानूनी परामर्श प्रदान किया। वहीं, 26 पारिवारिक मामलों का काउंसलिंग के माध्यम से समाधान कर परिवारों को टूटने से बचाने का प्रयास किया गया। आयोग ने इसे सामाजिक समरसता और महिला सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
स्वास्थ्य सेवाओं और साइबर अपराध मामलों में भी मिली राहत
एम्स ऋषिकेश के सहयोग से आयोजित स्वास्थ्य शिविर में 489 से अधिक लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इसके अतिरिक्त साइबर अपराध से जुड़े 124 मामलों का त्वरित निस्तारण कर पीड़ितों को तत्काल राहत उपलब्ध कराई गई। इससे शिविर केवल जागरूकता अभियान तक सीमित न रहकर बहुआयामी जनसेवा केंद्र के रूप में भी स्थापित हुआ।
‘यशोदा AI’ प्रशिक्षण से तकनीक और कानून में होगी महिलाओं की भागीदारी मजबूत
कुसुम कंडवाल ने बताया कि राज्य महिला आयोग भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए ‘यशोदा AI’ प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा वन स्टॉप सेंटर के कार्मिकों के विशेष प्रशिक्षण पर भी कार्य कर रहा है। इसका उद्देश्य महिलाओं को आधुनिक तकनीक, डिजिटल सुरक्षा और कानूनी अधिकारों के प्रति अधिक सक्षम बनाना है, ताकि वे आत्मनिर्भर होने के साथ-साथ किसी भी परिस्थिति में अपने अधिकारों की प्रभावी रक्षा कर सकें।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ‘सम्मान सेतु’ अभियान महिलाओं के प्रति संवेदनशील समाज के निर्माण और उन्हें त्वरित न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में एक सशक्त पहल साबित होगा।




