
चंपावत, 12 मार्च (दिलीप शर्मा): उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल और सदस्य किरण देवी की अध्यक्षता में गुरुवार को चंपावत में ‘महिला आयोग आपके द्वार’ अभियान के तहत महिला जनसुनवाई आयोजित की गई। जनसुनवाई में कुल 18 फरियादियों ने अपनी शिकायतें आयोग के समक्ष रखीं, जिनमें से 14 मामलों का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया, जबकि पारिवारिक विवाद से जुड़े 4 जटिल प्रकरणों को आगे की कार्रवाई के लिए आयोग मुख्यालय भेजा गया।
“जो महिलाएं आयोग तक नहीं पहुंच सकतीं, आयोग स्वयं उनके द्वार पहुंचेगा”
अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने बताया कि राष्ट्रीय महिला आयोग के आह्वान पर प्रदेश में 9 से 13 मार्च तक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस पांच दिवसीय अभियान के तहत आयोग की अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य विभिन्न जनपदों में जाकर जनसुनवाई कर रही हैं, ताकि कोई भी पीड़ित महिला न्याय से वंचित न रह जाए। उन्होंने कहा कि जो महिलाएं भौगोलिक या आर्थिक कारणों से देहरादून स्थित आयोग मुख्यालय तक नहीं पहुंच पातीं, आयोग स्वयं उनके द्वार तक पहुंच रहा है।
कार्यस्थलों पर ICC कमेटी बनाना अनिवार्य
जनसुनवाई के दौरान अध्यक्ष ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी सरकारी और निजी संस्थानों में कार्यस्थल पर महिलाओं के संरक्षण के लिए अनिवार्य रूप से आंतरिक शिकायत समिति (ICC) का गठन किया जाए। साथ ही विभागीय स्तर पर कार्यशालाएं और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाए।
पुलिस को संवेदनशील व्यवहार के निर्देश
अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि थानों में आने वाली महिलाओं के साथ पुलिस का व्यवहार संवेदनशील और मधुर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पीड़ित महिलाओं की शिकायतों को प्राथमिकता से सुना जाए और उनकी जांच त्वरित रूप से पूरी कर आयोग को रिपोर्ट भेजी जाए।
हत्या मामले में जांच अधिकारी बदलने के निर्देश
जनसुनवाई में एक महिला ने होली के दौरान अपने भाई की हत्या के मामले में जांच से असंतोष जताया। इस पर अध्यक्ष ने एसपी चंपावत को निर्देश दिए कि तत्काल जांच अधिकारी (आईओ) बदला जाए और मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए।
वहीं एक युवती ने अपने भाइयों द्वारा मारपीट और नशे की हालत में छेड़छाड़ का मामला रखा, जिस पर अध्यक्ष ने पुलिस को आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने और पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
पारिवारिक विवादों में समझौते पर दिया जोर
पारिवारिक मामलों की सुनवाई के दौरान अध्यक्ष ने कहा कि तलाक हर समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने पति-पत्नी से आपसी संवाद और समझदारी से परिवार को बचाने तथा बच्चों को अच्छे संस्कार देने की अपील की।
जनसमस्याओं पर भी हुई सुनवाई
जनसुनवाई में अमोली ग्राम की प्रधान ने क्षेत्र में पेयजल संकट की समस्या उठाई, जिस पर अध्यक्ष ने जिलाधिकारी चंपावत को निर्देशित किया कि पेयजल योजना को जल्द सुचारू कर महिलाओं को राहत दी जाए।
महिला सहायता सेवाओं के प्रचार पर जोर
अध्यक्ष ने 181 महिला हेल्पलाइन, वन स्टॉप सेंटर (OSC) और जिला प्रोबेशन अधिकारी (DPO) के माध्यम से मिल रही सुविधाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के माध्यम से निशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि महिलाओं के प्रति संवेदनशील व्यवहार और सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करना शासन और प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी है।
ये अधिकारी रहे मौजूद
जनसुनवाई में महिला आयोग की सदस्य किरण देवी, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. जी.एस. खाती, अपर जिलाधिकारी के.एन. गोस्वामी, एडिशनल सीएमओ डॉ. बलबीर सिंह, ब्लॉक प्रमुख अंचला बोहरा, क्षेत्र पंचायत सदस्य रजनी नरियाल, ग्राम प्रधान गीता देउपा, हेमा जोशी, प्रेमा पांडे, आनंद अधिकारी सहित जिला कार्यक्रम अधिकारी, वन स्टॉप सेंटर के कर्मचारी और विभिन्न विभागों के जनपद स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे।










