
देहरादून, 1 जून(दिलीप शर्मा): अंतर्राष्ट्रीय बाल सुरक्षा दिवस के अवसर पर उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने बच्चों की सुरक्षा और उनके भविष्य को लेकर अभिभावकों की भूमिका पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में तकनीक जहां बच्चों के विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है, वहीं उसका अनियंत्रित उपयोग बच्चों को जोखिम और भटकाव की ओर भी ले जा रहा है।
कुसुम कंडवाल ने कहा कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया और मोबाइल फोन के बढ़ते उपयोग के कारण बच्चों और किशोरों के गलत संगति एवं असामाजिक तत्वों के संपर्क में आने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। कई मामलों में यह पाया गया है कि घर से लापता होने, भटकने अथवा गलत रास्ते पर जाने वाले बच्चे सोशल मीडिया के माध्यम से अजनबियों के संपर्क में आए थे और कम उम्र तथा अनुभवहीनता के कारण उनके बहकावे में आ गए।
डिजिटल गतिविधियों पर रखें पैनी नजर
महिला आयोग अध्यक्ष ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि बच्चों को केवल मोबाइल फोन उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह जानना भी आवश्यक है कि वे दिनभर में कितना समय फोन पर बिता रहे हैं, किस प्रकार की सामग्री देख रहे हैं और सोशल मीडिया पर किन लोगों के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों की डिजिटल गतिविधियों की नियमित निगरानी आज की सबसे बड़ी पारिवारिक जिम्मेदारी बन गई है।
आभासी दुनिया में छिपे हैं कई खतरे
कुसुम कंडवाल ने चेतावनी देते हुए कहा कि इंटरनेट की आभासी दुनिया में ऐसे अनेक लोग सक्रिय हैं जो बच्चों की मासूमियत का फायदा उठाकर उनका मानसिक, शारीरिक या आर्थिक शोषण कर सकते हैं। ऐसे खतरों से बचाव के लिए अभिभावकों का जागरूक होना और बच्चों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
सुरक्षित भविष्य के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
उन्होंने कहा कि बच्चों को सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण प्रदान करने के साथ-साथ उनके स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करना भी जरूरी है। सही मार्गदर्शन, सकारात्मक संवाद और डिजिटल गतिविधियों की प्रभावी मॉनिटरिंग से ही बच्चों को संभावित खतरों से बचाया जा सकता है तथा उनके लिए सुरक्षित और सशक्त भविष्य का निर्माण किया जा सकता है।
अंतर्राष्ट्रीय बाल सुरक्षा दिवस पर उन्होंने समाज और अभिभावकों से आह्वान किया कि सभी मिलकर बच्चों को सुरक्षित डिजिटल वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाएं, ताकि नई पीढ़ी स्वस्थ, सुरक्षित और जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित हो सके।










