आयुर्वेदिक उपचार से एलोपेशिया एरियाटा के प्रबंधन में सुनीता को मिली राहत
नरेंद्रनगर आयुर्वेदिक चिकित्सालय में शोधन चिकित्सा, औषधियों और स्थानीय लेप से किया गया उपचार, प्रभावित हिस्सों में बालों की दोबारा वृद्धि के संकेत




टिहरी गढ़वाल (दिलीप शर्मा): बालों का झड़ना और सिर की त्वचा पर जगह-जगह बालों का कम होना व्यक्ति के आत्मविश्वास और दैनिक जीवन को प्रभावित कर सकता है। ऐसी ही समस्या से जूझ रहीं सुनीता को नरेंद्रनगर स्थित आयुर्वेदिक चिकित्सालय में उपचार के दौरान राहत मिली है। चिकित्सकीय रूप से एलोपेशिया एरियाटा (Alopecia Areata) से प्रभावित सुनीता का आयुर्वेदिक पद्धति से उपचार किया गया। उपचार के बाद प्रभावित हिस्सों में धीरे-धीरे बालों की पुनः वृद्धि देखी गई और बाल झड़ने से बने पैच का क्षेत्र कम होने लगा।

जिला सूचना अधिकारी कार्यालय की ओर से शनिवार को जारी सफलता की कहानी के अनुसार, सुनीता पिछले करीब छह माह से सिर के ऊपरी हिस्से यानी क्राउन ऑफ स्कैल्प पर बाल झड़ने की समस्या से परेशान थीं। जांच के दौरान सिर की त्वचा पर लगभग दो से तीन स्थानों पर बाल झड़ने से बने पैच पाए गए। चिकित्सकीय अभिलेखों में इस समस्या को एलोपेशिया एरियाटा के रूप में दर्ज किया गया, जिसे आयुर्वेद में इन्द्रलुप्त से संबंधित माना जाता है।
डॉ. वंदना डंगवाल ने तैयार की उपचार योजना
सुनीता के उपचार के लिए अपर जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. वंदना डंगवाल की ओर से उपचार योजना तैयार की गई। इसके तहत शोधन चिकित्सा, शमन चिकित्सा और स्थानीय लेप का प्रयोग किया गया। उपचार की योजना में दीपन-पाचन प्रक्रिया के साथ जलौकावचरण (जलौका चिकित्सा) को भी शामिल किया गया।
निर्धारित उपचार योजना के अनुसार, जलौकावचरण सप्ताह में एक बार दो माह तक किया जाना था। इसके लिए लगभग आठ सिटिंग निर्धारित की गई थीं। इसके अतिरिक्त रोगी को आयुर्वेदिक औषधियां दी गईं तथा सिर की प्रभावित त्वचा पर स्थानीय लेप का प्रयोग किया गया।
इन आयुर्वेदिक औषधियों का किया गया प्रयोग
उपचार के दौरान रोगी की स्थिति और उसमें हो रहे बदलावों का आकलन करने के लिए क्लीनिकल फोटोग्राफ्स के माध्यम से दस्तावेजीकरण भी किया गया। चिकित्सालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, उपचार में निम्नलिखित आयुर्वेदिक औषधियों का प्रयोग किया गया—
1. संजीवनी वटी
2. महामंजिष्ठादि क्वाथ
3. भृंगराज चूर्ण
4. त्रिफला चूर्ण
5. भृंगराज चूर्ण का स्थानीय लेप
प्रभावित हिस्सों में दोबारा उगने लगे बाल
चिकित्सालय के अनुसार, नियमित उपचार के बाद सुनीता की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार दिखाई देने लगा। जिन स्थानों पर बाल झड़ने के कारण पैच बन गए थे, वहां क्रमशः बालों की पुनः वृद्धि देखी गई। इसके साथ ही प्रभावित हिस्सों का क्षेत्र भी कम होने लगा।
इस सुधार से सुनीता को बाल झड़ने की समस्या में राहत मिली और उन्होंने संतोष व्यक्त किया। चिकित्सालय ने इस प्रकरण को एलोपेशिया एरियाटा के प्रबंधन में आयुर्वेदिक उपचार पद्धति के उपयोग के एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया है।
संतुलित आहार और नियमित दिनचर्या भी जरूरी : डॉ. वंदना डंगवाल
अपर जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. वंदना डंगवाल ने कहा कि आयुर्वेद केवल बीमारी होने के बाद उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए भी मार्गदर्शन प्रदान करता है। आयुर्वेदिक जीवनशैली में संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद, स्वच्छता और प्रकृति के अनुरूप जीवन जीने को विशेष महत्व दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि इन सिद्धांतों को दैनिक जीवन में अपनाकर व्यक्ति अपने स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक रह सकता है। समय रहते स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर ध्यान देना और आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श लेना भी महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी स्वस्थ जीवन के लिए जरूरी है।
नोट: एलोपेशिया एरियाटा में बाल झड़ने और दोबारा उगने का क्रम अलग-अलग व्यक्तियों में भिन्न हो सकता है। इस मामले में सामने आए सुधार को व्यक्तिगत उपचार परिणाम के रूप में देखा जाना चाहिए; इससे सभी रोगियों में समान परिणाम की गारंटी नहीं मानी जा सकती।





