शरद पूर्णिमा पर ध्यानमय हुआ गंगा तट, महायोग ध्यान कुंभ में योग और संगीत का संगम
महायोग ध्यान कुंभ-9.0 के तीसरे दिन आनापानसती ध्यान, योगाभ्यास और संगीतमय साधना में शामिल हुए देश-विदेश के साधक




- तेलंगाना के कड़ताल में वर्ष 2030 तक वैश्विक ध्यान केंद्र विकसित करने का लक्ष्य, बच्चों और युवाओं के लिए भी आयोजित हुईं विशेष कार्यशालाएं
मुनिकीरेती/टिहरी(दिलीप शर्मा): शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर ऋषिकेश के मुनि की रेती स्थित योग महोत्सव घाट पर आयोजित पांच दिवसीय महायोग ध्यान कुंभ-9.0 में योग, ध्यान, आध्यात्मिक संवाद और संगीत साधना का अनूठा संगम देखने को मिला। महोत्सव के तीसरे दिन देश-विदेश से पहुंचे साधकों ने सामूहिक ध्यान और योगाभ्यास के माध्यम से आंतरिक शांति, आत्म-जागरूकता और विश्व शांति का संदेश दिया।

पिरामिड स्पिरिचुअल सोसाइटीज मूवमेंट (पीएसएसएम) और पीएमसी हिंदी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सुबह से ही विभिन्न आध्यात्मिक गतिविधियों का सिलसिला जारी रहा। योगाभ्यास, आनापानसती ध्यान, भारतीय वाद्ययंत्रों की मधुर धुनों के बीच संगीतमय साधना और आध्यात्मिक विचार-विमर्श ने आयोजन को विशेष स्वरूप प्रदान किया। वहीं, बच्चों और युवाओं के लिए आयोजित कार्यशालाओं के माध्यम से ध्यान एवं आत्म-विकास का संदेश भी दिया गया।

योगाभ्यास से हुई दिन की शुरुआत, प्राणायाम के बताए महत्व
महोत्सव के तीसरे दिन प्रातःकालीन सत्र का शुभारंभ योग प्रशिक्षक सामंत के निर्देशन में हुआ। इस दौरान साधकों ने सूक्ष्म व्यायाम, ताड़ासन, तिर्यक ताड़ासन, कटी चक्रासन और शोल्डर रोटेशन सहित विभिन्न योगासनों का अभ्यास किया। इसके बाद अनुलोम-विलोम, नाड़ी शोधन, कपालभाति, ओंकार और भ्रामरी प्राणायाम कराया गया।
योग प्रशिक्षक सामंत ने शरीर के प्रति सजगता को सूक्ष्म चेतना की ओर बढ़ने का प्रारंभिक मार्ग बताया। उन्होंने कहा कि योग और ध्यान के नियमित अभ्यास से मन को एकाग्र करने तथा स्वयं के भीतर की चेतना को समझने में सहायता मिलती है। योगाभ्यास के माध्यम से व्यक्ति शारीरिक और मानसिक संतुलन की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

गंगा तट पर आनापानसती ध्यान, श्वास के प्रति सजग रहने का संदेश
योगाभ्यास के बाद वरिष्ठ पिरामिड मास्टर कविता चड्ढा ने साधकों को आनापानसती ध्यान का अभ्यास कराया। पितामह सुभाष पत्रीजी द्वारा प्रचारित इस ध्यान पद्धति में स्वाभाविक रूप से आने-जाने वाली श्वास के प्रति सजग रहने पर जोर दिया जाता है।
कविता चड्ढा ने कहा कि शरीर के लिए योग, मन के लिए शांति, बुद्धि के लिए ज्ञान और आत्मा के लिए ध्यान आवश्यक है। गंगा तट पर आयोजित सामूहिक ध्यान सत्र में साधकों ने मौन और शांत वातावरण के बीच अपनी श्वास पर ध्यान केंद्रित किया।
इस दौरान ब्रह्मर्षि पितामह सुभाष पत्रीजी के ध्यान संबंधी संदेशों को भी साझा किया गया। वक्ताओं ने नियमित ध्यान को शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति और आत्मचिंतन की दिशा में उपयोगी बताते हुए कहा कि ध्यान व्यक्ति को अपने विचारों, व्यवहार और कर्मों को समझने का अवसर प्रदान करता है। आत्म-अनुसंधान और कर्म सिद्धांत की समझ को आध्यात्मिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया गया।
भारतीय वाद्ययंत्रों की सुर लहरियों के बीच साधकों ने किया ध्यान
महायोग ध्यान कुंभ के तीसरे दिन आयोजित संगीतमय ध्यान सत्र विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। भारतीय शास्त्रीय वाद्ययंत्रों की मधुर धुनों के बीच साधकों ने ध्यान साधना की और संगीत के माध्यम से आंतरिक शांति का अनुभव करने का प्रयास किया।
कार्यक्रम में गणेश कुमार ने वायलिन, राघवेंद्र ने बांसुरी, राम कृष्ण ने सितार, कार्तिक प्रणव ने मृदंगम और संतोष ने तबले पर प्रस्तुति दी। विभिन्न वाद्ययंत्रों से निकली सुरमयी धुनों ने वातावरण को ध्यानमय बना दिया।
आयोजकों के अनुसार, संगीतमय ध्यान का उद्देश्य साधकों को दैनिक जीवन के शोर और तनाव से अलग होकर एकाग्रता, आत्म-जागरूकता और आंतरिक शांति की अनुभूति के लिए प्रेरित करना है। शरद पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित इस सत्र ने महोत्सव की आध्यात्मिक गतिविधियों को एक विशेष आयाम दिया।
कड़ताल में विकसित होगा वैश्विक ध्यान केंद्र, 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य
महोत्सव के विशेष सत्र में हैदराबाद के निकट तेलंगाना के कड़ताल स्थित महेश्वरा महापिरामिड और पत्रीजी शक्ति स्थल की गतिविधियों तथा भावी योजनाओं की जानकारी दी गई। ट्रस्ट के प्रतिनिधि टी. विजय भास्कर रेड्डी ने पितामह पत्रीजी के चार प्रमुख संदेशों को रेखांकित किया।
इन संदेशों में प्रतिदिन एक घंटा ध्यान करना, प्रतिदिन दस नए लोगों तक ध्यान का संदेश पहुंचाना, शाकाहार को प्रोत्साहित करना और घर-घर में पिरामिड स्थापित करना शामिल है।
उन्होंने बताया कि कड़ताल में लगभग 70 एकड़ क्षेत्र में विश्व ध्यान केंद्र और ‘स्टैच्यू ऑफ मेडिटेशन’ के निर्माण की दिशा में कार्य किया जा रहा है। आयोजकों ने इस परियोजना को ध्यान और आध्यात्मिक साधना के वैश्विक विस्तार की पहल बताते हुए वर्ष 2030 तक इसे वैश्विक ध्यान केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा है।
इस अवसर पर माधवी द्रिका, हरप्रीत सिंह, इशिता पुजारी, वेणु प्रसाद, महेश अग्रवाल, महेश्वरी मैडम और पी. वी. रामराजू सहित अन्य वक्ताओं ने पत्रीजी शक्ति स्थल की आध्यात्मिक महत्ता और सामूहिक ध्यान की उपयोगिता पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने साधकों से ध्यान को नियमित जीवन का हिस्सा बनाने तथा आत्म-अनुसंधान के माध्यम से आंतरिक परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
दिसंबर में आयोजित होगा 11 दिवसीय पत्रीजी ध्यान महायज्ञ
कार्यक्रम के दौरान साधकों को तेलंगाना के कड़ताल में 21 से 31 दिसंबर 2026 तक आयोजित होने वाले 11 दिवसीय ‘पत्रीजी ध्यान महायज्ञ’ में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया। वक्ताओं ने इसे सामूहिक ध्यान को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित करने और देश-विदेश के साधकों को एक मंच पर जोड़ने का अवसर बताया।
इस दौरान ‘चलो रे पत्रीजी शक्ति स्थल’ गीत पर सांस्कृतिक प्रस्तुति भी दी गई। कार्यक्रम में ध्यान, आध्यात्मिक साधना और सामूहिक सहभागिता के माध्यम से शांति एवं सकारात्मकता का संदेश प्रसारित किया गया।
बच्चों और युवाओं के लिए विशेष कार्यशालाएं, 108 घंटे का अखंड ध्यान भी आकर्षण
महायोग ध्यान कुंभ के अंतर्गत बच्चों और युवाओं को ध्यान तथा आत्म-विकास से जोड़ने के लिए विशेष कार्यशालाएं आयोजित की गईं। बच्चों के लिए ‘जाग्रत किड्स’ और युवाओं के लिए ‘स्वानुभव यूथ’ कार्यक्रमों के माध्यम से आत्म-जागरूकता, व्यक्तित्व विकास और ध्यान के महत्व से संबंधित गतिविधियां कराई गईं।
इसके अतिरिक्त, विश्व शांति के उद्देश्य से 108 घंटे के अखंड सामूहिक ध्यान कार्यक्रम को भी महोत्सव की प्रमुख गतिविधियों में शामिल किया गया।
आयोजकों ने बताया कि महायोग ध्यान कुंभ-9.0 का मुख्य उद्देश्य योग, ध्यान और आत्मचिंतन को जन-जन तक पहुंचाना तथा व्यक्तिगत आंतरिक परिवर्तन के माध्यम से विश्व शांति की भावना को मजबूत करना है। महोत्सव के तीसरे दिन आयोजित योगाभ्यास, आनापानसती ध्यान, संगीतमय साधना और आध्यात्मिक संवाद ने इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाया।





