श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्री राम यंत्र की स्थापना, राष्ट्रपति ने किया शुभारंभ
द्रौपदी मुर्मू के कर कमलों से हुआ आयोजन; राज्यपाल, मुख्यमंत्री सहित संत-धर्माचार्यों की गरिमामयी उपस्थिति


अयोध्या/ऋषिकेश,19 मार्च (दिलीप शर्मा): चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, विक्रम संवत 2083 के पावन अवसर पर अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर परिसर में एक भव्य एवं ऐतिहासिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर भारत की माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने श्री राम यंत्र की विधिवत स्थापना की। यह आयोजन भारतीय सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक माना जा रहा है।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय सहित कई विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।

इस अवसर पर प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु माता अमृतानंदमयी, ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविन्द गिरि, परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविन्द्र पुरी तथा अन्य संत-धर्माचार्यों और विभूतियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम की शुरुआत मंदिर परिसर के विभिन्न स्थलों के दर्शन एवं आरती से हुई। इसके पश्चात विधिवत मंत्रोच्चार के बीच श्री राम यंत्र की स्थापना की गई। यह स्थापना आध्यात्मिक ऊर्जा, सकारात्मकता और धर्म के मूल्यों के प्रसार का प्रतीक मानी जा रही है।
अपने संबोधन में स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में प्रत्येक पर्व और तिथि जीवन को नई दिशा और ऊर्जा प्रदान करती है। नवसंवत्सर एवं चैत्र नवरात्रि के इस शुभ अवसर पर श्री राम यंत्र की स्थापना समाज में आध्यात्मिक उन्नति और उच्च मूल्यों की स्थापना का संदेश देती है।
उन्होंने कहा कि नवसंवत्सर का यह पर्व सृजन, संतुलन और धर्म की पुनर्स्थापना का प्रतीक है तथा यह हमें आत्मोन्नति, सेवा और धर्मपालन के मार्ग पर अग्रसर होने की प्रेरणा देता है।
कार्यक्रम के दौरान स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से भेंट कर उन्हें ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन आने का आमंत्रण भी दिया।
यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना, बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और राष्ट्रीय एकता का भी एक सशक्त संदेश देने वाला रहा।










